ये सर्वशक्तिमान सरकारें सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया तक ठीक से नहीं कर पातीं. बातें ऐसे छौंकती हैं, जैसे आसामान में धान बो देंगे. हम एक भर्ती की गड़बड़ी को दिखाते हैं. दर्जनों नई धांधलियां सामने आ जाती हैं. स्टूडेंट्स पढ़ाई करें या ट्विटर ट्रेंड की फिक्र करें.
इस देश की सरकारें देश की तस्वीर और तकदीर बदलने का दावा करती हैं. आलम ये है कि देश की नौकरियों के इम्तिहान तक ठीक से नहीं करवा पातीं. सालाना उपक्रम को तीन चार पांच साल तक खींचा जाता है.
किसी का भी ईश्वर बचाने नहीं आएगा कोरोना से. इसलिए ईश्वर के नाम पर लड़ना, कोसना, बचना, बचाना बंद करिए. जो जिम्मेदार हैं, उन्हें सख्त सजा होनी चाहिए.
हमें लगा था कि कोरोना संकट के बाद दुनिया ज्यादा साइंटिफिक टैंपरामेंट वाली होगी.
गलत लगा था क्या...