तेरा ख़याल ही सुबह की पहली सुखन है,
हर किरण जैसे उम्मीद की इक पैरहन है।
जो कल शब-ए-ग़म की ज़द में थी कहीं,
वो जान फिर सँभलने को बेताब है।
तेरी रहमत से दिल को मिला दस्त-ए-सुकूँ ,
अब हर साँस जैसे एक अहद-ए-वफ़ा है।
Goodmorning
सूरज की किरणें जब धरती को छू जाती हैं,
फूलों की खुशबू हर दिल को महका जाती है,
प्रकृति के हर रंग में है ईश्वर का नूर,
जो इसे महसूस करे, ज़िंदगी मुस्कुरा जाती है।
Good Morning!
रात की चादर उतर रही थी,
मैं दुआ बनकर बिखर रही थी।
हर किरन में तेरा नाम लिया,
हर सहर में तुझे महसूस किया।
हवा ने जब बालों को छुआ,
लगा — तेरी आवाज़ आई है।
Good morning
Good Morning
सुब्ह की रौशनी में मैं नई उम्मीद जगाती हूँ,
बीती बातों को दिल से धीरे-धीरे मिटाती हूँ।
जो आज है, उसे मुस्कान बनकर अपनाती हूँ—
हर नए दिन में मैं अपनी दुनिया सजाती हूँ। 🌸
जो सुबह की नमी है, वही दिल की दुआ होती है,
रात के अंधेरों में बस यही रौशनी रोती है।
मैंने भी आँसू पोंछकर मुस्कुराना सीखा,
क्योंकि हर सुबह मोहब्बत की नई वजह होती है।
Good morning
वो चला गया तो क्या, साँस तो बाकी है,
सुबह की ठंडी हवा में एक चाहत अभी बाकी है।
टूटी थी मगर बिखरी नहीं उस मोहब्बत में,
रात के ज़ख्मों से उभरती नई रौशनी अभी बाकी है।
Good morning
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जब सोचें मिलती हैं, हवा में राग घुलने लगती है,
सुबह का हर पल नया गीत कहने लगती है।
अंखियों में ठहर जाती है उम्मीद की झिलमिलाहट,
क़िस्मत के सितारे भी चुपके से मुस्कुराने लगते हैं।
“आशा” के संग जीना कोई हुनर नहीं, एहसास है,
हर पल को महसूसना, जैसे खुद से मेरी मुलाक़ात है।
Good
सुबह की किरणें दर ओ दीवार से कुछ कहने लगीं,
रात की घुटन उजाले में चुपचाप पिघलने लगी।
मन की परछाइयाँ धीरे-धीरे उतरने लगीं,
भीतर की आवाज़ साफ़ होकर उभरने लगी।
दीवारों के पीछे छुपी हर कैद को रोशनी ने तोड़ दी,
इस नए आगाज ने एक उजली उम्मीद बो दी।
Goodmorning
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हर सुबह नई उजाली, हर दिन नई बात,
मेहनत से लिखो अपनी तक़दीर की सौगात।
रुकना नहीं, चाहे हों राह में अंधेरे हजार,
तेरे जज़्बे से ही रोशन होगा ये संसार।
Good Morning
सहर आई तो लगा शायद कोई समझ लेगा उसे,
मगर रौशनी भी उसके दर्द से न मिल सकी।
जहाँ को बस हँसी की तलाश थी हर तरफ़,
वो सच की राह में यूँ ही तन्हा पिघलती रही।
Good morning
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Goodmorning X friends
काले घर में सूरज रख, तूने सोचा मैं हार जाऊँगी,
मैंने एक चिराग़ जलाकर, अपना रस्ता पाऊँगी।
मौत की शह देकर भी, तू मात न दे पाया,
मैंने ख़ाक़ हो के भी, अपने वजूद को थाम लिया।
सहर की रौशनी में तुम्हारी सूरत जगमगाई है,
हर किरन में तेरी याद की ख़ुशबू समाई है।
फ़िज़ा में तेरे नाम का नग़मा गूंजता रहा,
आज फिर मोहब्बत ने सुबह सजाई है।
लबों पर दुआ, दिल में तेरी बात ठहरी,
हर साँस में तुम्हारी महक अब भी लिपटी है गहरी।
तू दूर सही, मगर एहसास पास है
“मेहनत और प्रभात” —
रात की चादर हटे तो उजाला करना है,
थकान चाहे जितनी हो, संभलकर चलना है।
मंज़िल नहीं मिलती बस सोचे जाने से,
हर सुबह खुद को फिर से गढ़ना है। ☀️
Goodmorning