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देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले वित्त वर्ष के लिए आम बजट एक फरवरी को पेश करेंगी। बतौर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह नौवां बजट होगा। हर साल संसद में पेश किया जाने वाला आम बजट देश की सरकार का वार्षिक वित्तीय प्लान होता है। इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत तैयार किया जाता है। इसमें आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय और प्रस्तावित खर्च का पूरा ब्यौरा होता है। राजस्व विभाग कर और शुल्क जैसे आय के स्रोतों को संभालता है जबकि व्यय विभाग यह तय करता है कि फंड कहां और कैसे खर्च किया जाएगा। यह बजट सरकार के लिए एक वित्तीय रोडमैप की तरह काम करता है।
वैसे तो एक फरवरी को भारत का केंद्रीय बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी लेकिन इस दस्तावेज को तैयार करने में कई लोग लगते हैं। बजट को वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले आर्थिक कार्य विभाग के बजट डिवीजन द्वारा तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरे वर्ष चलती रहती है, जिसमें अलग-अलग मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों से सुझाव और अनुमान मांगे जाते हैं। वहीं, अलग-अलग यूनियन या हितधारकों की मांग पर भी विचार किया जाता है। बजट डिवीजन इन सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर सरकार की आय, खर्च, घाटा और प्राथमिकताओं का आकलन करता है। इसमें टैक्स कलेक्शन, सब्सिडी, डिफेंस, एजुकेशन, हेल्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के लिए आवंटन तय किए जाते हैं। इसकी समय-समय पर वित्त मंत्री द्वारा समीक्षा भी की जाती है। वहीं, प्रधानमंत्री को भी अपडेट दिया जाता है।
केंद्रीय बजट पेश होने से पहले इसकी तैयारी एक बेहद गोपनीय और व्यवस्थित प्रक्रिया से गुजरती है। बजट की छपाई नॉर्थ ब्लॉक के भीतर स्थित सरकारी प्रेस में की जाती है, जहां सीमित अधिकारी और कर्मचारी कई दिनों तक रहते हैं ताकि किसी भी तरह की जानकारी बाहर न जा सके। इस प्रक्रिया की शुरुआत पारंपरिक हलवा सेरेमनी से होती है, जिसे बजट निर्माण के अंतिम चरण का प्रतीक माना जाता है। बजट दस्तावेज की सामग्री, आंकड़े और नीतिगत प्रस्ताव पूरी तरह गोपनीय रहते हैं और संसद में पेश किए जाने से पहले तक किसी को इसकी भनक नहीं लगती। संसद में जिस मेज पर वित्त मंत्री बजट भाषण देती हैं, वह संसद सचिवालय और संबंधित तकनीकी स्टाफ द्वारा पहले से तय मानकों के अनुसार तैयार की जाती है, ताकि सभी दस्तावेज, टैबलेट या फाइलें आसानी से रखी जा सकें। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बजट पेश करते समय किसी भी तरह की तकनीकी या व्यवस्थागत कमी न रहे।
भारत की आजादी के बाद से वार्षिक के अलावा अंतरिम और मिनी बजट भी पेश किए जा चुके हैं। वर्ष 1947 से अब तक भारत में 73 वार्षिक बजट प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इसके अलावा 14 अंतरिम बजट भी पेश हुए, जो आमतौर पर चुनाव से पहले नई सरकार के गठन तक के लिए होते हैं। इसके साथ ही 4 विशेष या मिनी बजट भी पेश किए गए हैं, जो आपातकालीन या विशेष आर्थिक परिस्थितियों में लाए गए। हर बजट अपने समय की आर्थिक स्थिति, राजनीतिक सोच और सामाजिक जरूरतों को दर्शाता है। इन बजटों के माध्यम से देश की विकास यात्रा और नीतिगत बदलावों को समझा जा सकता है।
साल 2017 से देश का आम बजट हर साल एक फरवरी को पेश किया जाता है। इसका मकसद ये होता है कि सरकार को नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले नीतियों और योजनाओं को लागू करने के लिए पूरा समय मिल सके। इससे संसद में बजट पर चर्चा, विभागों को फंड आवंटन और राज्यों तक राशि पहुंचाने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है। इससे सरकारी योजनाएं, विकास कार्य और कल्याणकारी कार्यक्रम वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही सुचारु रूप से लागू हो पाते हैं। बता दें कि पहले बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था।