
इस महीने की बेस्ट सेलिंग बुक्स। इस महीने की ‘टॉप टेन’ पुस्तकें। हिंदी के सबसे लोकप्रिय लेखकों की बीस किताबें। हिंदी की अवश्य पढ़ने योग्य पुस्तकें। इनको नहीं पढ़ा, तो कुछ नहीं पढ़ा। हिंदी की चुनिंदा पुस्तकें। महीने की पठनीय पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं…

आइए भारत की ज्ञान परंपराओं को खोजें, ज्ञान व्यवस्थाओं को तलाशें, उन्हें पुनरुज्जीवित करें और एक बार फिर दुनिया को ताल ठोककर बता दें कि भारत किसी के ज्ञान का गुलाम नहीं, उसके पास अपना ज्ञान भंडार है…

एक पत्रिका ने सावधान किया है कि हे साथी, फासिज्म आ रहा है... फासिज्म आ चुका है... फासिज्म जम चुका है... फासिज्म पक चुका है... फासिज्म सबको खा चुका है। एक लेखक ने अपनी टिप्पणी में एक दर्जन से अधिक बार बताया कि फासिज्म आ चुका है…

एक ने हिंदी के कई साहित्यकारों को सांप्रदायिक कह दिया, तो हंगामा हो गया। आजू-बाजू खड़े हिंदी के सोशल साहित्यिक ‘सूरमा’ अपने-अपने हरबे-हथियार लेकर कूद पड़े…
किसी को तीन पुस्तकों पर तीन सम्मान मिल चुके हैं। किसी को चार पुस्तकों पर चार। किसी-किसी को तो एक ही किताब पर दो-दो पुरस्कार मिल चुके हैं और किसी को एक ही रचना पर तीन सम्मान। इन दिनों जितने लेखक हैं, उनसे ज्यादा सम्मान हैं…
लगता है, नया बरस मेरे ऊपर कुछ अतिरिक्त कृपालु है। एक वाट्सएप संदेश कह रहा है कि ‘सर जी, नववर्ष मंगलमय हो’... मोबाइल नंबर...! दूसरा वाट्सएप संदेश कह रहा है, ‘नया वर्ष आपके जीवन में ढेर सारी खुशियां लाए…
इस गली गया, तो ‘कम्यूनल’ हुआ, उस गली गया, तो ‘सेक्युलर’ हुआ। एक में गया, तो दूसरे से गया; दूसरे में गया, तो पहले से गया। सच कहूं, हमारे जैसे तटस्थ साहित्यकार की आजकल बड़ी समस्या है। कुछ लोग अपने हाथों में ठप्पे लिए बैठे…
इस गली गया, तो ‘कम्यूनल’ हुआ, उस गली गया, तो ‘सेक्युलर’ हुआ। एक में गया, तो दूसरे से गया; दूसरे में गया, तो पहले से गया। सच कहूं, हमारे जैसे तटस्थ साहित्यकार की आजकल बड़ी समस्या है। कुछ लोग अपने हाथों में ठप्पे लिए बैठे…
हमारे एक साहित्यिक मित्र बड़े ही पुस्तक-प्रेमी रहे। दिल्ली में जब भी कोई नई अंग्रेजी पुस्तक आती, वह उनके पास होती। वह अक्सर कुछ नई पुस्तकों को अपने कलेजे से इस तरह लगाकर कैंपस में घूमते नजर आते कि उनके नाम सामने…
एक नामी साहित्यिक संस्था के साहित्यिक आयोजन का कुछ लेखक संगठनों ने विरोध और बॉयकॉट किया। इधर बॉयकॉटिए बॉयकॉट करते रहे और खबर बनाते रहे, उधर आयोजकों के प्रोगाम ज्यों के त्यों चलते रहे…