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भगवान श्री कृष्ण विष्णु जी केअवतार माने जाते हैं। भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ, वे देवकी और वसुदेव के पुत्र थे। भगवान कृष्ण द्वापर युग में बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्मे थे। भागवत पुराण में भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है। भगवान श्री कृष्ण की महाभारत के युद्ध में बहुत बड़ी भूमिका थी, उन्होंने अर्जुन का सारथी बनकर इस युद्ध में गीता का उपदेश दिया।

कृष्ण जी की आरती आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की (Krishna ki aarti Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Giridhar Krishna Murari Ki)

कुंजबिहारी की आरती

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  • आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • गले में बंसी, मुख पर बिंदिया, नंद के आनंद नंदलाला की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • गायें जो गोपियाँ संग राधिका, कुंज गली में मुरलीधारी की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • कनक के फुल्लन से तन शोभित, उटी रखत बनमाली की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • श्री अंग पे पीताम्बर शोभित, उटी चुनरी पिताम्बर की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • लसत बेंदी शोभित शिर पर, नख पर कुंडल झलकत है॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • भ्रमर को चंचल तात टेढ़े-मेढ़े, कुंचित केश लटकत है॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • अंग-अंग में फूलन की वसना, मुद-मुदात मुरलीधारी की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • श्री अंग में वक्ष चन्दन शोभित, चारु चित्र बिनोद छवि की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

  • आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

कुंजबिहारी की आरती

त्यौहार एवं तिथियाँ

  • त्योहारतारीख (2026)
  • होली (धुलंडी)बुधवार, 4 मार्च 2026
  • रुक्मणी विवाह (द्वादशी)मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
  • श्री कृष्ण जन्माष्टमीशुक्रवार, 4 सितंबर 2026
  • रासलीला (शरद पूर्णिमा)रविवार, 25 अक्टूबर 2026
  • दीपावलीरविवार, 8 नवंबर 2026
  • गोवर्धन पूजामंगलवार, 10 नवंबर 2026
  • गोपाष्टमीमंगलवार, 17 नवंबर 2026
जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भक्त विशेष रूप से Janmashtami Aarti करते हैं, जिसमें सबसे लोकप्रिय Aarti kunj bihari ki है। कृष्ण जी की आरती भक्तों को आनंद और भक्ति से भर देती है, और आरती कुंजबिहारी की के मधुर बोल कान्हा की बाल लीलाओं का स्मरण कराते हैं। मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी आरती का अद्भुत दृश्य देखने योग्य होता है, जहाँ हजारों श्रद्धालु दीपक और भजनों के साथ कृष्ण प्रेम में लीन होकर Aarti krishna ji ki गाते हैं।

प्रसिद्ध मंदिर

  • मंदिर का नामस्थान
  • द्वारकाधीश मंदिरद्वारका, गुजरात
  • गुरुवायुर मंदिरगुरुवायुर, केरल
  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिरमथुरा, उत्तर प्रदेश
  • बांके बिहारी मंदिरवृंदावन, उत्तर प्रदेश
  • इस्कॉन मंदिरवृंदावन, दिल्ली, मथुरा आदि
  • जगन्नाथ मंदिरपुरी, ओडिशा
  • नाथद्वारा मंदिरनाथद्वारा, राजस्थान
  • उडुपी श्री कृष्ण मंदिरउडुपी, कर्नाटक

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श्रीकृष्ण आरती से जुड़े प्रश्न और उत्तर

  • जन्माष्टमी पर कौन-सी आरती सबसे प्रसिद्ध है?

    जन्माष्टमी पर “आरती कुंजबिहारी की” सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरतियों में से एक है।

  • कृष्ण जी की आरती में क्या शामिल होता है?

    कृष्ण जी की आरती में दीपक, धूप, फूल, घंटी और भजन के साथ भगवान कृष्ण की स्तुति की जाती है।

  • कृष्ण जी की आरती करने का महत्व क्या है?

    जन्माष्टमी पर कृष्ण जी की आरती करने से भक्त के मन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

  • कृष्ण जी की आरती जन्माष्टमी में कब की जाती है?

    जन्माष्टमी में कृष्ण जी की आरती मध्यरात्रि 12 बजे भगवान के जन्म के तुरंत बाद की जाती है। इस समय भक्त आरती और भजनों के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाते हैं।